सक्रिय अधिगम एक शिक्षण दृष्टिकोण है जिसमें छात्र चर्चा, समस्या-समाधान, समूह कार्य और चिंतन जैसे कार्यों के माध्यम से अधिगम प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, न कि निष्क्रिय रूप से जानकारी प्राप्त करते हैं। यह अवधारणा, शैक्षिक मनोविज्ञान में निहित, इस बात पर जोर देती है कि शिक्षार्थियों को सार्थक समझ प्राप्त करने के लिए केवल सुनने से अधिक करना चाहिए। जैसा कि बोनवेल और आइसन (1991) ने उल्लेख किया, छात्र तब भाग लेते हैं जब वे निष्क्रिय रूप से सुनने के अलावा कुछ और कर रहे होते हैं। इस विधि की तुलना अक्सर निष्क्रिय अधिगम से की जाती है, जहां छात्र मुख्य रूप से व्याख्यान या पठन सामग्री के प्राप्तकर्ता होते हैं।
यह शब्द 20वीं शताब्दी के अंत में उच्च शिक्षा साहित्य में प्रमुखता से उभरा, जिसमें चार्ल्स बोनवेल और जेम्स आइसन जैसे विद्वानों ने 1991 में इसकी परिभाषा को औपचारिक रूप दिया। सक्रिय अधिगम शिक्षार्थी-केंद्रित है, जिसमें छात्रों को विश्लेषण, संश्लेषण और मूल्यांकन जैसे उच्च-क्रम सोच कार्यों में संलग्न होना आवश्यक है। यह तीन अधिगम क्षेत्रों - ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण (KSA) - के साथ संरेखित होता है। हैनसन और मोसर (2003) और शेवेन्स एट अल. (2008) के शोध से पता चलता है कि सक्रिय शिक्षण तकनीकें शैक्षणिक परिणामों में सुधार कर सकती हैं, छात्रों की रुचि और प्रेरणा बढ़ा सकती हैं, और आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान और सामाजिक कौशल का निर्माण कर सकती हैं।
ऐतिहासिक विकास
सक्रिय अधिगम की जड़ें जॉन डेवी जैसे शैक्षिक दार्शनिकों तक जाती हैं, जिन्होंने 20वीं शताब्दी की शुरुआत में अनुभवात्मक अधिगम की वकालत की। हालांकि, "सक्रिय अधिगम" शब्द 1980 और 1990 के दशक में व्यापक रूप से उपयोग में आया, जब शिक्षकों ने पारंपरिक व्याख्यान-आधारित निर्देश के विकल्पों की तलाश की। उच्च शिक्षा के अध्ययन के लिए एसोसिएशन ने 1990 के दशक में प्रभावशाली रिपोर्टें प्रकाशित कीं, जिन्होंने सक्रिय अधिगम पद्धतियों पर शोध को संश्लेषित किया, इस बात पर जोर देते हुए कि छात्रों को प्रभावी ढंग से सीखने के लिए पढ़ना, लिखना, चर्चा करना और समस्या-समाधान में संलग्न होना चाहिए। इन रिपोर्टों ने सहयोगात्मक अधिगम, समस्या-आधारित अधिगम और प्रौद्योगिकी-संवर्धित निर्देश जैसी रणनीतियों को लोकप्रिय बनाने में मदद की।
मूल सिद्धांत
बार्न्स (1989) ने सात सिद्धांतों की रूपरेखा दी जो प्रभावी सक्रिय अधिगम की विशेषता बताते हैं:
- उद्देश्यपूर्ण: कार्य छात्रों की चिंताओं और लक्ष्यों से प्रासंगिक होते हैं।
- चिंतनशील: छात्र जो सीखते हैं उसके अर्थ पर चिंतन करते हैं।
- वार्तालापित: लक्ष्य और विधियाँ छात्रों और शिक्षकों के बीच वार्ता के माध्यम से तय होते हैं।
- आलोचनात्मक: छात्र सामग्री सीखने के विभिन्न तरीकों और माध्यमों की सराहना करते हैं।
- जटिल: कार्य वास्तविक जीवन की जटिलताओं से तुलना करते हैं और चिंतनशील विश्लेषण को प्रोत्साहित करते हैं।
- स्थिति-संचालित: अधिगम कार्य स्थिति की आवश्यकताओं के आधार पर स्थापित किए जाते हैं।
- संलग्न: वास्तविक जीवन के कार्य गतिविधियों में परिलक्षित होते हैं।
ये सिद्धांत इस बात पर जोर देते हैं कि सक्रिय अधिगम केवल गतिविधि के बारे में नहीं है, बल्कि सार्थक संलग्नता के बारे में है जो छात्रों के जीवन से जुड़ती है और गहरी समझ को बढ़ावा देती है।
अधिगम वातावरण
सक्रिय अधिगम के लिए ऐसे वातावरण की आवश्यकता होती है जो रचनावादी रणनीतियों का समर्थन करते हैं और पारंपरिक दर्शनों से विकसित हुए हैं। प्रभावी वातावरण अन्वेषण के माध्यम से शोध-आधारित अधिगम को बढ़ावा देते हैं, प्रामाणिक विद्वत्तापूर्ण सामग्री रखते हैं, और आत्म-विकास गतिविधियों के माध्यम से नेतृत्व कौशल को प्रोत्साहित करते हैं। वे सहयोगात्मक अधिगम के लिए उपयुक्त वातावरण भी बनाते हैं, गतिशील अंतःविषय अनुभवों को विकसित करते हैं। पूर्व ज्ञान का नए ज्ञान के साथ एकीकरण महत्वपूर्ण है, और कार्य-आधारित प्रदर्शन संवर्धन छात्रों को विषय वस्तु की यथार्थवादी व्यावहारिक समझ देता है।
शिक्षक विशेषताएँ
जेरोम आई. रोटगैंस और हेंक जी. श्मिट के शोध ने तीन शिक्षक गुणों की पहचान की जो सक्रिय अधिगम कक्षाओं में छात्रों की स्थितिजन्य रुचि से सहसंबंधित हैं:
- सामाजिक सामंजस्य: एक सामंजस्यपूर्ण शिक्षक-छात्र संबंध छात्रों को बिना भय के अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति देता है, जिससे भागीदारी और रुचि बढ़ती है।
- विषय-वस्तु विशेषज्ञता: व्यापक ज्ञान वाले शिक्षक छात्रों को अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करते हैं; कम जानकार शिक्षक रुचि को कम कर सकते हैं।
- संज्ञानात्मक सामंजस्य: जो शिक्षक जटिल अवधारणाओं को सरल बनाते हैं और प्रश्नों के माध्यम से छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं, वे छात्रों को अपनी अधिगम क्षमताओं पर भरोसा करने और संगठित सोच विकसित करने में मदद करते हैं।
ये गुण शिक्षक की भूमिका को व्याख्याता के बजाय सुविधाकर्ता के रूप में उजागर करते हैं, एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जहां छात्र खोज करने और प्रश्न पूछने में सुरक्षित महसूस करते हैं।
रणनीतियाँ और तकनीकें
सक्रिय अधिगम में रणनीतियों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है, जिसमें खेल के माध्यम से अधिगम, प्रौद्योगिकी-आधारित अधिगम, गतिविधि-आधारित अधिगम, समूह कार्य और परियोजना विधियाँ शामिल हैं। सामान्य तकनीकों में सोच-जोड़ी-साझा, सहकर्मी निर्देश, केस अध्ययन, सिमुलेशन और समस्या-आधारित अधिगम शामिल हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी छात्र भाग लें, शिक्षक ब्लूम के संज्ञानात्मक वर्गीकरण पर आधारित उच्च-क्रम प्रश्नों का उपयोग कर सकते हैं, जो विश्लेषण, संश्लेषण और मूल्यांकन को प्रोत्साहित करते हैं। निम्न-क्रम प्रश्न, जो याद किए गए तथ्यों पर आधारित होते हैं, छात्रों को संलग्न कर सकते हैं लेकिन गहरी सोच को बढ़ावा नहीं देते। प्रतिक्रिया कार्ड या डिजिटल मतदान जैसी कुल भागीदारी तकनीकें भी सभी छात्रों को शामिल कर सकती हैं।
परिणाम और चुनौतियाँ
अध्ययनों से पता चला है कि सक्रिय अधिगम उपलब्धि स्तर और सामग्री निपुणता को बढ़ावा दे सकता है। हालांकि, कुछ छात्र और शिक्षक इस नई तकनीक को अपनाना कठिन पाते हैं। चुनौतियों में निष्क्रिय अधिगम के आदी छात्रों का प्रतिरोध, शिक्षकों के लिए बढ़ा हुआ तैयारी समय और उपयुक्त कक्षा संसाधनों की आवश्यकता शामिल है। इन बाधाओं के बावजूद, सक्रिय अधिगम को विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों में तेजी से एकीकृत किया जा रहा है, विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) शिक्षा में, जहां इंटरैक्टिव संलग्नता परीक्षा प्रदर्शन में सुधार और विफलता दर को कम करने के लिए दिखाया गया है।
आधुनिक शिक्षा में अनुप्रयोग
सक्रिय अधिगम उच्च शिक्षा, K-12 सेटिंग्स और व्यावसायिक प्रशिक्षण में व्यापक रूप से लागू किया जाता है। Machine learning संदर्भों में, "सक्रिय अधिगम" शब्द एक अलग अवधारणा को भी संदर्भित करता है: एनोटेशन लागत को कम करने के लिए लेबलिंग के लिए सबसे जानकारीपूर्ण डेटा नमूनों का चयन करना। यह दोहरा उपयोग भ्रम पैदा कर सकता है, लेकिन शिक्षा में, ध्यान छात्र संलग्नता पर बना रहता है। प्रौद्योगिकी-आधारित अधिगम, जिसमें ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और इंटरैक्टिव सिमुलेशन शामिल हैं, ने सक्रिय अधिगम की संभावनाओं का विस्तार किया है, जिससे छात्रों को आभासी प्रयोगशालाओं, चर्चा मंचों और सहयोगात्मक परियोजनाओं में भाग लेने की अनुमति मिलती है। जैसे-जैसे शैक्षिक शोध विकसित होता रहता है, सक्रिय अधिगम प्रभावी शिक्षाशास्त्र की आधारशिला बना हुआ है, जो अधिगम प्रक्रिया में छात्र भागीदारी के महत्व पर जोर देता है।
यह भी देखें
- मशीन लर्निंग
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- डीप लर्निंग
- तंत्रिका नेटवर्क
- बड़ा भाषा मॉडल
- ट्रांसफॉर्मर
- जनरेटिव एआई
- ओपनएआई
- एंथ्रोपिक
- गूगल डीपमाइंड
- अमेज़न वेब सर्विसेज
- एज़्योर
- गूगल क्लाउड
- ओरेकल क्लाउड
- कोरवीव
- सेरेब्रास
- ग्रॉक
- सांबा-नोवा
- ग्राफकोर
- नोकिया बेल लैब्स
- ज़ेरॉक्स पार्क
- एमआईटी सीएसएआईएल
- स्टैनफोर्ड एआई लैब
- टोरंटो विश्वविद्यालय
- कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय
- बर्कले एआई रिसर्च
- ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय
- थॉमस डिटेरिच
- माइकल जॉर्डन
- डैफने कोलर
- अनिमा आनंदकुमार
- सैमी बेंजियो
- जोशुआ टेनेनबाम
- ब्रेंडन लेक
- मेलानी मिशेल
- आरोन कौरविल
- एलन पर्लिस
- अलेक्जेंडर मैड्री
- एलेक्सी एफ्रोस
- अली रहीमी
- एंड्रयू लॉयड-ब्राउन
- अनी भट्टाचार्य
- अन्ना पैटरसन
- अन्ना रिटर
- अनुभव सिन्हा
- अराकावा रयोटा
- अर्का दत्ता
- आर्थर फ्रांज
- बेन गोएर्टज़ेल
- बर्नार्ड विड्रो
- ब्रायन चेउंग
- ब्रायन क्रिश्चियन
- ब्रायन लिली-व्हाइट
- कैल्वो राफेल
- कार्लोस गेस्ट्रिन
- कैथरीन फ्लिक
- चाड मिर्किन
- चिन-येन चिउ
- क्रिस बिशप
- क्रिस्टोफर बिशप
- क्रेग बाउटिलियर
- क्रेग कु
- डैफना शेरोन
- डैफने लियोन
- डेविड हा
- डेविड फ्रॉइट्ज़हाइम
- डेविड मार्टिन
- डेविड विंगर
- दीपक कुमार
- ड्रू पकेट
- एलेन रिच
- एइलॉन रेशेफ