बर्नहार्ड शॉलकोफ (जन्म 20 फरवरी 1968) एक जर्मन कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं, जिन्हें मशीन लर्निंग में योगदान के लिए पहचाना जाता है, विशेष रूप से कर्नेल विधियों और कार्य-कारण (कॉज़लिटी) में। वह टूबिंगन, जर्मनी में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलिजेंट सिस्टम्स में निदेशक के रूप में कार्यरत हैं, और अनुभवजन्य अनुमान विभाग का नेतृत्व करते हैं। वह ETH ज़्यूरिख में प्रोफेसर, टूबिंगन विश्वविद्यालय और तकनीकी विश्वविद्यालय बर्लिन में मानद प्रोफेसर, और यूरोपीय लैबोरेटरी फॉर लर्निंग एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स (ELLIS) के अध्यक्ष के रूप में भी संबद्ध हैं।
उनका कार्य सांख्यिकीय लर्निंग को कार्य-कारण अनुमान के साथ जोड़ता है, जिसका उद्देश्य वितरण परिवर्तनों के तहत एल्गोरिदम को मजबूत बनाना है। शॉलकोफ ने कई शोध पहलों की सह-स्थापना की है और संपादकीय बोर्डों में सेवा की है, जिससे आधुनिक मशीन लर्निंग शोध को आकार दिया गया है।
कर्नेल विधियों पर शोध
शॉलकोफ का प्रारंभिक कार्य सपोर्ट वेक्टर मशीनों (SVMs) और कर्नेल-आधारित एल्गोरिदम पर केंद्रित था। 1990 के दशक के अंत में, उन्होंने और सहयोगियों ने SVM विधियों का उपयोग करके MNIST हस्तलेखन पहचान बेंचमार्क पर अत्याधुनिक प्रदर्शन हासिल किया। इस सफलता ने पैटर्न पहचान के लिए कर्नेल विधियों की क्षमता को उजागर किया।
एक महत्वपूर्ण योगदान कर्नेल प्रिंसिपल कंपोनेंट एनालिसिस (कर्नेल PCA) की शुरुआत थी, जिसने प्रजनन कर्नेल के माध्यम से शास्त्रीय PCA को गैर-रेखीय सेटिंग्स तक सामान्यीकृत किया। इस कार्य ने दिखाया कि SVMs को डॉट उत्पादों के संदर्भ में व्यक्त एल्गोरिदम की एक व्यापक श्रेणी के विशेष मामले के रूप में देखा जा सकता है, बशर्ते कर्नेल ग्राम मैट्रिक्स सकारात्मक निश्चित हो। इसने वेक्टरियल डेटा से परे कर्नेल विधियों की प्रयोज्यता को भी बढ़ाया, जब तक एक मान्य कर्नेल फ़ंक्शन परिभाषित किया जा सके।
शॉलकोफ ने कर्नेल विधियों को प्रतिगमन, पूर्व-निर्दिष्ट स्पार्सिटी के साथ वर्गीकरण, और सपोर्ट/क्वांटाइल अनुमान तक विस्तारित किया, एलेक्स स्मोला जैसे शोधकर्ताओं के साथ सहयोग करते हुए। उन्होंने एक प्रतिनिधि प्रमेय सिद्ध किया जो दर्शाता है कि प्रजनन कर्नेल हिल्बर्ट स्पेस में कई कर्नेल-आधारित नियमितीकृत अनुकूलन समस्याओं के समाधान प्रशिक्षण डेटा पर कर्नेल विस्तार का रूप लेते हैं। उन्होंने वितरणों के कर्नेल एम्बेडिंग भी सह-विकसित किए, उन्हें स्वतंत्रता परीक्षण और फ्रौनहोफर विवर्तन जैसी भौतिकी की अवधारणाओं से जोड़ा।
कार्य-कारण अनुमान
लगभग 2005 में, शॉलकोफ ने अपने शोध का ध्यान कार्य-कारण अनुमान की ओर स्थानांतरित किया। उन्होंने पहचाना कि जबकि मशीन लर्निंग आमतौर पर सांख्यिकीय निर्भरताओं का दोहन करती है, कार्य-कारण ज्ञान हस्तक्षेपों और वितरण परिवर्तनों के तहत भविष्यवाणी को सक्षम बनाता है। उनके समूह ने दो-चर सेटिंग्स में कार्य-कारण खोज को संबोधित किया, इसे एल्गोरिदमिक सूचना सिद्धांत से जोड़ा।
2011 में, उन्होंने "लर्निंग कॉज़ेज़ एंड कॉज़ल लर्निंग" पर NeurIPS मुख्य भाषण दिया, जिसने कार्य-कारण विचारों को व्यापक मशीन लर्निंग दर्शकों तक पहुँचाया। उनके बाद के कार्य ने कार्य-कारण तंत्रों की स्वतंत्रता और अपरिवर्तनीयता सिद्धांतों पर जोर दिया ताकि लर्निंग को वितरणात्मक परिवर्तनों के प्रति मजबूत बनाया जा सके। यह ढांचा खगोल विज्ञान में व्यावहारिक अनुप्रयोग पाया, जहाँ उनकी प्रयोगशाला द्वारा विकसित विधियों ने नए एक्सोप्लैनेट की पहचान करने में मदद की, जिसमें K2-18b शामिल है, जिसके वातावरण में बाद में जल वाष्प पाया गया।
शिक्षा और करियर
शॉलकोफ ने टूबिंगन और लंदन में गणित, भौतिकी और दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया, लंदन विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और टूबिंगन विश्वविद्यालय से भौतिकी में डिप्लोम प्राप्त किया। अपने डॉक्टरेट शोध के दौरान उन्होंने न्यू जर्सी में बेल लैब्स में व्लादिमीर वापनिक के साथ काम किया, जिन्होंने TU बर्लिन में उनकी थीसिस का सह-पर्यवेक्षण किया; उन्होंने 1997 में डॉक्टरेट पूरी की। उनकी शोध प्रबंध ने जर्मन इंफॉर्मेटिक्स सोसाइटी का वार्षिक पुरस्कार अर्जित किया।
कैम्ब्रिज और न्यूयॉर्क में पदों के बाद, वह 2001 में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल साइबरनेटिक्स में विभाग प्रमुख बने। 2011 में वह नव स्थापित मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलिजेंट सिस्टम्स में निदेशक के रूप में चले गए। उन्होंने एलेक्स स्मोला के साथ मशीन लर्निंग समर स्कूल श्रृंखला, कैम्ब्रिज-टूबिंगन पीएचडी कार्यक्रम, और मैक्स प्लैंक-ETH सेंटर फॉर लर्निंग सिस्टम्स की सह-स्थापना की। 2016 में उन्होंने स्टटगार्ट-टूबिंगन में साइबर वैली शोध संघ की सह-स्थापना की, जो AI शोध के लिए एक सार्वजनिक-निजी साझेदारी है।
शॉलकोफ कई पत्रिकाओं के संपादक रहे हैं, जिसमें जर्नल ऑफ मशीन लर्निंग रिसर्च (JMLR) की सह-स्थापना और सह-मुख्य संपादक के रूप में सेवा शामिल है। उनकी प्रयोगशाला ने कई प्रभावशाली शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित किया है, जिनमें उलरिके वॉन लक्सबर्ग, कार्ल रासमुसेन, मथायस हेन, गुन्नार रैत्श, और सैमी बेंगियो शामिल हैं (हालांकि उनकी प्रयोगशाला से नहीं; वास्तविक पूर्व छात्रों में आर्थर ग्रेटन, स्टेफनी जेगेल्का, और अन्य शामिल हैं)। उन्होंने OpenPanel और Essential AI जैसी AI पहलों के लिए सलाहकार बोर्डों में भी सेवा की है।
कार्य-कारण अनुमान योगदान
लगभग 2005 से, शॉलकोफ का शोध मशीन लर्निंग में कार्य-कारण मॉडल के उपयोग की ओर स्थानांतरित हुआ। उन्होंने तर्क दिया कि कार्य-कारण तंत्र डेटा में सांख्यिकीय निर्भरताएँ उत्पन्न करते हैं, लेकिन मानक विधियाँ केवल बाद का दोहन करती हैं; स्पष्ट कार्य-कारण ज्ञान वितरण परिवर्तनों के तहत सामान्यीकरण में सुधार करता है। उन्होंने दो-चर कार्य-कारण खोज समस्या को संबोधित किया और इसे तंत्रों की स्वतंत्रता और अपरिवर्तनीयता धारणाओं से जोड़ा।
उनके विचार NeurIPS 2011 में एक मुख्य भाषण और ICML 2017 में एक ट्यूटोरियल के माध्यम से व्यापक दर्शकों तक पहुँचे। उनके समूह ने अवलोकनात्मक डेटा से कार्य-कारण दिशाओं का अनुमान लगाने के लिए एल्गोरिदम विकसित किए, और इन्हें जलवायु विज्ञान और खगोल भौतिकी की समस्याओं पर लागू किया। इस कार्य ने एक्सोप्लैनेट की पहचान में योगदान दिया, जिसमें K2-18b शामिल है, जिसे बाद में इसके वातावरण में जल वाष्प युक्त पाया गया।
शिक्षा और करियर
शॉलकोफ ने टूबिंगन विश्वविद्यालय और लंदन विश्वविद्यालय में गणित, भौतिकी और दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया, जिसे स्टुडिएन्स्टिफ्टुंग डेस डॉयचेन वोल्केस द्वारा समर्थित किया गया। उन्होंने अपनी मास्टर थीसिस के लिए लियोनेल कूपर मेमोरियल पुरस्कार जीता। वापनिक के मार्गदर्शन में पीएचडी पूरी करने के बाद, उन्होंने कैम्ब्रिज और न्यूयॉर्क के विश्वविद्यालयों में पदों पर कार्य किया, जिसमें NEC रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल है।
उन्होंने 2001 में अनुभवजन्य अनुमान विभाग की स्थापना की, जो एक अग्रणी मशीन लर्निंग समूह बन गया। 2011 में, वह मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलिजेंट सिस्टम्स के संस्थापक निदेशक बने, जो सिद्धांत से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और गहन लर्निंग में अनुप्रयोगों तक फैले शोध की देखरेख करते हैं। वह यूरोपीय लैबोरेटरी फॉर लर्निंग एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स (ELLIS) में भी शामिल रहे हैं, जो अपनी स्थापना से नेटवर्क के बोर्ड की अध्यक्षता कर रहे हैं।
सम्मान और संबद्धताएँ
शॉलकोफ को कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें रॉयल सोसाइटी मिलनर पुरस्कार और BBVA फाउंडेशन फ्रंटियर्स ऑफ नॉलेज पुरस्कार (व्लादिमीर वापनिक और इसाबेल गुयोन के साथ साझा) शामिल हैं। उन्हें 2026 में रॉयल सोसाइटी का फेलो चुना गया। 2023 के अंत तक, वह फ्रांसीसी गैर-लाभकारी AI प्रयोगशाला क्यूताई के सलाहकार बोर्ड सदस्य हैं, जो ज़ेवियर निएल, एरिक श्मिट और अन्य द्वारा वित्त पोषित है।
उनका व्यापक प्रकाशन रिकॉर्ड कर्नेल विधियों और कार्य-कारण अनुमान पर मोनोग्राफ शामिल करता है, और वह कंप्यूटर विज्ञान में सबसे अधिक उद्धृत शोधकर्ताओं में से एक बने हुए हैं। उनका कार्य सिद्धांत और व्यवहार के बीच सेतु रहा है, जो पैटर्न पहचान, न्यूरोइमेजिंग और जलवायु विज्ञान जैसे क्षेत्रों को प्रभावित करता है।
बाहरी प्रभाव
शॉलकोफ के विचारों ने आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध को आकार दिया है। उनकी कर्नेल-आधारित तकनीकें, हालांकि कुछ क्षेत्रों में गहन लर्निंग द्वारा आंशिक रूप से प्रतिस्थापित हैं, उच्च-आयामी डेटा को समझने के लिए मौलिक बनी हुई हैं। उनका कार्य-कारण अनुमान ढांचा तेजी से तंत्रिका नेटवर्क मॉडल के साथ एकीकृत हो रहा है, जो अधिक मजबूत और व्याख्यात्मक मशीन लर्निंग प्रणालियों को सक्षम बनाता है। उन्होंने AI नैतिकता और सुरक्षा पर नीति चर्चाओं में भी योगदान दिया है, IEEE ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन एथिकली अलाइन्ड डिज़ाइन में भाग लिया है।