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निल्स जॉन निल्सन (1933–2019) कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में एक अग्रणी अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक थे, जो अपने शोध, पाठ्यपुस्तकों और स्टैनफोर्ड तथा SRI में नेतृत्व के लिए जाने जाते थे।

निल्स जॉन निल्सन (6 फरवरी 1933 - 23 अप्रैल 2019) एक अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रारंभिक विकास में एक केंद्रीय व्यक्ति थे। उन्होंने खोज एल्गोरिदम, योजना और रोबोटिक्स में मौलिक योगदान दिया, और 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: ए न्यू सिंथेसिस' (1998) सहित प्रभावशाली पाठ्यपुस्तकें लिखीं। निल्सन ने अपने करियर का अधिकांश समय स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट (अब SRI इंटरनेशनल) में बिताया और बाद में स्टैनफोर्ड एआई लैब में, जहाँ उन्होंने शोधकर्ताओं की पीढ़ियों को आकार दिया।

अक्रोन, ओहायो में जन्मे, निल्सन ने 1953 में कार्नेगी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (अब कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री और 1958 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएच.डी. प्राप्त की। वे 1961 में SRI में शामिल हुए, जहाँ उन्होंने पैटर्न पहचान और मशीन लर्निंग पर काम किया। 1966 में, वे SRI में कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र के निदेशक बने, एक भूमिका जो उन्होंने 1973 तक निभाई। इस अवधि के दौरान, उन्होंने A* खोज एल्गोरिदम के विकास में योगदान दिया, जो पथ-खोज और ग्राफ ट्रैवर्सल का आधार है, और रोबोटिक्स में उपयोग होने वाली STRIPS योजना प्रणाली में भी योगदान दिया।

शैक्षणिक करियर और नेतृत्व

निल्सन 1985 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में कुमागई प्रोफेसर ऑफ इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान विभाग के अध्यक्ष के रूप में चले गए। उन्होंने 1985 से 1990 तक स्टैनफोर्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लेबोरेटरी (SAIL) का निर्देशन भी किया, जॉन मैकार्थी के बाद। उनके नेतृत्व में, SAIL ने मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और ज्ञान प्रतिनिधित्व में अग्रणी शोध की अपनी परंपरा जारी रखी। निल्सन 1996 में स्टैनफोर्ड से सेवानिवृत्त हुए, लेकिन एमेरिटस प्रोफेसर के रूप में सक्रिय रहे, एआई नैतिकता और क्षेत्र के भविष्य पर लेखन और व्याख्यान देते रहे।

एआई अनुसंधान में योगदान

SRI में निल्सन का प्रारंभिक कार्य सांख्यिकीय पैटर्न पहचान पर केंद्रित था, जिसकी परिणति उनकी 1965 की पुस्तक 'लर्निंग मशीन्स' में हुई, जिसने प्रशिक्षण योग्य क्लासिफायर के तरीकों की शुरुआत की। उन्होंने बाद में निल्स जे. निल्सन (स्वयं लेखक) के साथ 'प्रॉब्लम-सॉल्विंग मेथड्स इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (1971) सह-लिखित की, जिसने खोज और अनुमानी तकनीकों को व्यवस्थित किया। उनकी 1980 की पाठ्यपुस्तक 'प्रिंसिपल्स ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' एक मानक संदर्भ बन गई, जिसमें तर्क, योजना और तर्क शामिल थे। 1998 की 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: ए न्यू सिंथेसिस' ने शास्त्रीय एआई को आधुनिक संभाव्य और तंत्रिका नेटवर्क दृष्टिकोणों के साथ एकीकृत किया, जो क्षेत्र के विकास को दर्शाता है।

निल्सन ने A एल्गोरिदम के विकास में भी योगदान दिया, जिसे उन्होंने 1968 में पीटर हार्ट और बर्ट्राम राफेल के साथ सह-आविष्कार किया। A आज भी नेविगेशन, वीडियो गेम और रोबोटिक्स में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। STRIPS (स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट प्रॉब्लम सॉल्वर) पर उनका काम स्वचालित योजना के लिए एक औपचारिक भाषा प्रदान करता है, जिसने बाद की योजना प्रणालियों को जनरेटिव एआई और स्वायत्त एजेंटों में प्रभावित किया।

पुरस्कार और सम्मान

निल्सन को कई प्रशंसाएँ मिलीं, जिनमें 2003 में IJCAI रिसर्च एक्सीलेंस अवार्ड और 2011 में AAAI फीगेनबाम अवार्ड शामिल हैं। वे अमेरिकन एसोसिएशन फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AAAI) और अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस के फेलो थे। 2014 में, उन्हें एआई और रोबोटिक्स में उनके योगदान के लिए नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के लिए चुना गया। उनकी विरासत निल्स निल्सन अवार्ड के माध्यम से भी संरक्षित है, जो स्वीडिश एआई सोसाइटी द्वारा एआई में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है।

बाद के वर्ष और विरासत

सेवानिवृत्ति के बाद, निल्सन ने 'द क्वेस्ट फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: ए हिस्ट्री ऑफ आइडियाज एंड अचीवमेंट्स' (2010) लिखी, जो इसकी उत्पत्ति से लेकर 21वीं सदी की शुरुआत तक एआई का एक व्यापक ऐतिहासिक विवरण है। वे जिम्मेदार एआई विकास के एक मुखर समर्थक बने रहे, जो मानव मूल्यों के साथ संरेखित प्रणालियों की आवश्यकता पर जोर देते थे। निल्सन का 2019 में निधन हो गया, लेकिन उनकी पाठ्यपुस्तकें और एल्गोरिदम शिक्षा और उद्योग में उपयोग किए जा रहे हैं। उनका प्रभाव आधुनिक एआई अनुप्रयोगों तक फैला है, जैसे गहन शिक्षण से लेकर बड़े भाषा मॉडल तक, जो उनके द्वारा स्थापित नींव पर निर्मित हैं।

निल्सन के करियर ने एआई के प्रतीकात्मक और सांख्यिकीय युगों को जोड़ा, और उनका काम एमआईटी सीएसएआईएल और बर्कले एआई रिसर्च जैसे संस्थानों के शोधकर्ताओं के लिए एक आधारशिला बना हुआ है। कठोर, औपचारिक तरीकों पर उनका जोर और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने क्षेत्र पर एक स्थायी छाप छोड़ी है।

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