डगलस कार्ल एंगेलबार्ट (30 जनवरी, 1925 – 2 जुलाई, 2013) एक अमेरिकी इंजीनियर, आविष्कारक और कंप्यूटर विज्ञान के कई पहलुओं में अग्रणी थे। वे SRI इंटरनेशनल में अपनी ऑग्मेंटेशन रिसर्च सेंटर लैब में रहते हुए मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन के क्षेत्र की स्थापना के लिए सबसे अधिक जाने जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कंप्यूटर माउस का निर्माण और हाइपरटेक्स्ट, नेटवर्क वाले कंप्यूटर और ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के अग्रदूतों का विकास हुआ। ये नवाचार 1968 में "द मदर ऑफ ऑल डेमोस" में प्रदर्शित किए गए थे। एंगेलबार्ट का नियम, यह अवलोकन कि मानव प्रदर्शन की आंतरिक दर घातीय है, उनके नाम पर रखा गया है।
एंगेलबार्ट का काम इंटरैक्टिव कंप्यूटिंग के माध्यम से मानव बुद्धि को बढ़ाने पर केंद्रित था, एक दृष्टि जिसने दशकों के अनुसंधान और विकास को आकार दिया। उनके योगदान ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर जनरेटिव एआई तक के क्षेत्रों को प्रभावित किया, और उनकी अवधारणाएं आधुनिक कंप्यूटिंग प्रणालियों में मौलिक बनी हुई हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
एंगेलबार्ट का जन्म पोर्टलैंड, ओरेगन में 30 जनवरी, 1925 को कार्ल लुईस एंगेलबार्ट और ग्लेडिस शार्लोट अमेलिया मुनसन एंगेलबार्ट के यहां हुआ था। उनके पूर्वज जर्मन, स्वीडिश और नॉर्वेजियन मूल के थे। वे तीन बच्चों में से मध्य थे, जिनमें एक बहन डोरिएन (तीन साल बड़ी) और एक भाई डेविड (14 महीने छोटा) शामिल थे। परिवार अपने प्रारंभिक वर्षों में पोर्टलैंड में रहता था और जब वे 8 साल के थे तब जॉनसन क्रीक के आसपास के ग्रामीण इलाके में स्थानांतरित हो गया। उनके पिता एक साल बाद मर गए। उन्होंने 1942 में पोर्टलैंड के फ्रैंकलिन हाई स्कूल से स्नातक किया।
ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी में अपने स्नातक वर्षों के बीच, उन्होंने फिलीपींस में रेडियो और रडार तकनीशियन के रूप में संयुक्त राज्य नौसेना में दो साल सेवा की। वहां, लेयते के दूरदराज के द्वीप पर स्टिल्ट पर बनी एक छोटी पारंपरिक झोपड़ी में, उन्होंने वानेवर बुश का लेख "As We May Think" पढ़ा, जिसका उनकी सोच और कार्य पर बड़ा प्रभाव पड़ा। वे ओरेगन स्टेट लौट आए और 1948 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री पूरी की। ओरेगन स्टेट में रहते हुए, वे सिग्मा फी एप्सिलॉन सामाजिक बिरादरी के सदस्य थे।
उन्हें नेशनल एडवाइजरी कमेटी फॉर एयरोनॉटिक्स में एम्स रिसर्च सेंटर में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने पवन सुरंग रखरखाव में काम किया। अपने खाली समय में उन्हें लंबी पैदल यात्रा, शिविर लगाना और लोक नृत्य का आनंद मिलता था। वहां उनकी मुलाकात बैलार्ड फिश (18 अगस्त, 1928 – 18 जून, 1997) से हुई, जो अभी-अभी एक व्यावसायिक चिकित्सक बनने का प्रशिक्षण पूरा कर रही थीं। उन्होंने 5 मई, 1951 को पोर्टोला स्टेट पार्क में शादी की। इसके तुरंत बाद, एंगेलबार्ट ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में स्नातक अध्ययन के लिए एम्स छोड़ दिया। बर्कले में, उन्होंने कंप्यूटर में विशेषज्ञता के साथ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का अध्ययन किया, 1953 में मास्टर ऑफ साइंस (एमएस) और 1955 में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) प्राप्त की।
मार्गदर्शक दर्शन
एंगेलबार्ट का करियर दिसंबर 1950 में प्रेरित हुआ जब वे शादी के लिए सगाई कर चुके थे और महसूस किया कि उनके पास "एक स्थिर नौकरी, शादी और सुखी जीवन" के अलावा कोई करियर लक्ष्य नहीं था। कई महीनों में उन्होंने तर्क दिया कि वे अपने करियर को दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने पर केंद्रित करेंगे, कि दुनिया को बेहतर बनाने का कोई भी गंभीर प्रयास किसी प्रकार के संगठित प्रयास की आवश्यकता होगी जो सभी लोगों की सामूहिक मानव बुद्धि को प्रभावी समाधान में योगदान देने के लिए उपयोग करे, और यदि आप इसे कैसे करते हैं इसमें नाटकीय रूप से सुधार कर सकते हैं, तो आप महत्वपूर्ण समस्याओं को हल करने के लिए ग्रह पर हर प्रयास को बढ़ावा देंगे। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि कंप्यूटर इस क्षमता को नाटकीय रूप से सुधारने का वाहन हो सकते हैं।
1945 में, एंगेलबार्ट ने रुचि के साथ वानेवर बुश का लेख "As We May Think" पढ़ा था, जो ज्ञान को राष्ट्रीय शांतिकालीन महान चुनौती के रूप में व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के लिए एक कॉल टू एक्शन था। उन्होंने कंप्यूटर की हालिया घटना के बारे में भी कुछ पढ़ा था, और रडार तकनीशियन के रूप में अपने अनुभव से, वे जानते थे कि जानकारी का विश्लेषण किया जा सकता है और स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जा सकता है। उन्होंने बौद्धिक कार्यकर्ताओं की कल्पना की जो डिस्प्ले "वर्किंग स्टेशन" पर बैठे हों, सूचना स्थान में उड़ते हुए, अपनी सामूहिक बौद्धिक क्षमता का उपयोग करके महत्वपूर्ण समस्याओं को अधिक शक्तिशाली तरीकों से एक साथ हल कर रहे हों। सामूहिक बुद्धि का उपयोग करना, इंटरैक्टिव कंप्यूटर द्वारा सुगम, उनके जीवन का मिशन बन गया, ऐसे समय में जब कंप्यूटर को केवल संख्या गणना उपकरण के रूप में देखा जाता था।
स्नातक कार्य और प्रारंभिक करियर
बर्कले में स्नातक छात्र के रूप में, एंगेलबार्ट ने CALDIC के निर्माण में सहायता की। उनके स्नातक कार्य ने आठ पेटेंट दिए। डॉक्टरेट पूरा करने के बाद, एंगेलबार्ट एक साल के लिए बर्कले में सहायक प्रोफेसर के रूप में रहे, जब यह स्पष्ट हो गया कि वे वहां अपनी दृष्टि का पीछा नहीं कर सकते। फिर एंगेलबार्ट ने भंडारण उपकरणों पर अपने डॉक्टरेट अनुसंधान के कुछ हिस्से को व्यावसायिक बनाने के लिए एक स्टार्टअप कंपनी, डिजिटल टेक्नीक्स बनाई, लेकिन एक साल बाद 1951 से सपने देख रहे अनुसंधान को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
भंडारण उपकरणों और चुंबकीय प्रौद्योगिकी पर उनके प्रारंभिक कार्य ने बाद के नवाचारों के लिए आधार तैयार किया। इस अवधि के दौरान उनके द्वारा विकसित सिद्धांत, जिनमें कुशल सूचना पुनर्प्राप्ति और प्रदर्शन शामिल थे, बाद में उनके इंटरैक्टिव सिस्टम के डिजाइन को सूचित करेंगे। कार्यों को स्वचालित करने के बजाय मानव क्षमताओं को बढ़ाने पर उनका ध्यान कंप्यूटिंग के उभरते क्षेत्र में कई समकालीनों से उनके दृष्टिकोण को अलग करता था।
SRI और ऑग्मेंटेशन रिसर्च सेंटर
एंगेलबार्ट ने 1957 में मेंलो पार्क, कैलिफोर्निया में SRI इंटरनेशनल (तब स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट के रूप में जाना जाता था) में एक पद ग्रहण किया। उन्होंने हेविट क्रेन के साथ चुंबकीय उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक्स के लघुकरण पर काम किया; एंगेलबार्ट और क्रेन करीबी दोस्त बन गए। SRI में, एंगेलबार्ट ने जल्द ही एक दर्जन पेटेंट प्राप्त किए, और 1962 तक अपनी दृष्टि और प्रस्तावित अनुसंधान एजेंडा के बारे में एक रिपोर्ट तैयार की, जिसका शीर्षक था ऑगमेंटिंग ह्यूमन इंटेलेक्ट: ए कॉन्सेप्चुअल फ्रेमवर्क। अनुसंधान को एयर फोर्स ऑफिस ऑफ साइंटिफिक रिसर्च द्वारा वित्त पोषित किया गया था, जहां रोवेना स्वानसन ने एंगेलबार्ट के कार्य में सक्रिय रुचि ली। अन्य मुख्य आकर्षणों के बीच, इस पेपर ने "बिल्डिंग इन्फॉर्मेशन मॉडलिंग" पेश किया, जिसे वास्तुकला और इंजीनियरिंग अभ्यास ने अंततः 1990 के दशक और उसके बाद (पहले "पैरामीट्रिक डिजाइन" के रूप में) अपनाया।
इससे ARPA से उनके काम को शुरू करने के लिए वित्त पोषण मिला। एंगेलबार्ट ने अपने नए ऑग्मेंटेशन रिसर्च सेंटर (ARC, एसआरआई में स्थापित उनकी प्रयोगशाला) में एक शोध दल की भर्ती की। एंगेलबार्ट ने अपनी प्रयोगशाला में संगठनात्मक सिद्धांतों का एक सेट शामिल किया, जिसे उन्होंने "बूटस्ट्रैपिंग रणनीति" कहा। उन्होंने अपनी प्रयोगशाला के नवाचार की दर को तेज करने के लिए रणनीति डिजाइन की। ARC ऑन-लाइन सिस्टम (NLS) के डिजाइन और विकास के पीछे प्रेरक शक्ति बन गया, एक क्रांतिकारी कंप्यूटर सिस्टम जिसने कई अब-आम सुविधाओं को एकीकृत किया।
द ऑन-लाइन सिस्टम और द मदर ऑफ ऑल डेमोस
"ऑन-लाइन सिस्टम" (NLS) ऑग्मेंटेशन रिसर्च सेंटर द्वारा एंगेलबार्ट के मार्गदर्शन में विकसित किया गया था, जिसमें अधिकांश वित्त पोषण एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (ARPA) से था, जिसे बाद में डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA) का नाम दिया गया, ने कई प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया, जिनमें से अधिकांश अब व्यापक रूप से उपयोग में हैं। इसमें कंप्यूटर माउस, बिटमैप्ड स्क्रीन, वर्ड प्रोसेसिंग और हाइपरटेक्स्ट शामिल थे। ये सभी 1968 में "द मदर ऑफ ऑल डेमोस" में प्रदर्शित किए गए थे, एक ऐतिहासिक सार्वजनिक प्रदर्शन जिसमें लगभग 1,000 लोगों के दर्शकों को एक लाइव इंटरैक्टिव कंप्यूटिंग सत्र दिखाया गया था।
प्रदर्शन में, एंगेलबार्ट और उनकी टीम ने माउस और कीबोर्ड का उपयोग करके पाठ का वास्तविक समय संपादन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और सहयोगी कार्य दिखाया। माउस, एंगेलबार्ट और उनके सहयोगी बिल इंग्लिश द्वारा आविष्कार किया गया, दो धातु पहियों के साथ एक लकड़ी का खोल था जो आंदोलन को ट्रैक करता था। प्रदर्शन में हाइपरटेक्स्ट लिंक भी शामिल थे, जो उपयोगकर्ताओं को दस्तावेजों के बीच रैखिक रूप से नेविगेट करने की अनुमति देते थे, और एक विंडोइंग सिस्टम जो आधुनिक ग्राफिकल यूजर इंटरफेस का पूर्वाभास करता था। ये नवाचार अपने समय से दशकों आगे थे और ज़ेरॉक्स पार्क और अन्य अनुसंधान केंद्रों में बाद के विकास को प्रभावित किया।
NLS सिस्टम ने बिटमैप्ड डिस्प्ले का उपयोग किया, जिसने उस समय के सामान्य कैरेक्टर-आधारित टर्मिनलों के विपरीत, ग्राफिक्स और पाठ को लचीले तरीके से प्रस्तुत करने की अनुमति दी। इसने सहयोगी संपादन का भी समर्थन किया, जहां कई उपयोगकर्ता एक ही दस्तावेज़ पर एक साथ काम कर सकते थे, एक अवधारणा जो आधुनिक क्लाउड-आधारित सहयोग उपकरणों का पूर्वाभास करती थी। प्रदर्शन को कंप्यूटिंग इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में व्यापक रूप से देखा गया, जो मानव बुद्धि को बढ़ाने के लिए इंटरैक्टिव कंप्यूटिंग की क्षमता दिखाता है।
बाद का करियर और ऑगमेंट सिस्टम
प्रयोगशाला को 1970 के दशक के अंत में SRI से टाइमशेयर में स्थानांतरित कर दिया गया था, जिसे 1984 में मैकडॉनेल डगलस द्वारा अधिग्रहित किया गया था, और NLS का नाम बदलकर ऑगमेंट कर दिया गया (अब डग एंगेलबार्ट इंस्टीट्यूट)। टाइमशेयर और मैकडॉनेल डगलस दोनों में, एंगेलबार्ट उनके विचारों और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए धन की कमी से सीमित थे और 1986 में सेवानिवृत्त हुए। व्यावसायिक चुनौतियों के बावजूद, ऑगमेंट सिस्टम का उपयोग कुछ संदर्भों में जारी रहा, और इसकी अवधारणाओं ने सहयोगी सॉफ्टवेयर और ज्ञान प्रबंधन में बाद के कार्य को प्रभावित किया।
1988 में, एंगेलबार्ट और उनकी बेटी क्रिस्टीना ने बूटस्ट्रैप इंस्टीट्यूट - बाद में द डग एंगेलबार्ट इंस्टीट्यूट के रूप में जाना - अपनी दृष्टि को बढ़ावा देने के लिए, विशेष रूप से स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में, शुरू किया। इस प्रयास के परिणामस्वरूप ऑगमेंट के यूजर इंटरफेस को आधुनिक बनाने के लिए कुछ DARPA वित्त पोषण मिला। संस्थान ने सामूहिक बुद्धि और संगठनात्मक सीखने के बारे में उनके विचारों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया, जिसे उन्होंने जटिल वैश्विक चुनौतियों को संबोधित करने के लिए आवश्यक माना। उनके बाद के कार्य ने संगठनों और समाज में नवाचार की दर को तेज करने के लिए "बूटस्ट्रैपिंग" रणनीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया।
पुरस्कार और मान्यता
एंगेलबार्ट ने मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन में अपने अग्रणी कार्य के लिए कंप्यूटर विज्ञान में सर्वोच्च सम्मान, 1997 का ACM ट्यूरिंग पुरस्कार जीता। दिसंबर 2000 में, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने एंगेलबार्ट को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी पदक प्रदान किया, जो अमेरिका का सर्वोच्च प्रौद्योगिकी पुरस्कार है। दिसंबर 2008 में, "मदर ऑफ ऑल डेमोस" की 40वीं वर्षगांठ पर SRI द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। ये मान्यताएं उनके जीवन में देर से आईं, लेकिन उन्होंने आधुनिक कंप्यूटिंग पर उनके विचारों के गहरे प्रभाव को स्वीकार किया।
उनकी विरासत माउस, हाइपरटेक्स्ट और ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के व्यापक रूप से अपनाने में स्पष्ट है, जो अब व्यक्तिगत कंप्यूटिंग में मानक हैं। मानव बुद्धि को बढ़ाने के लिए कंप्यूटर का उपयोग करने की उनकी दृष्टि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में शोधकर्ताओं को प्रेरित करती है, जहां मानव क्षमताओं को बढ़ाने का लक्ष्य केंद्रीय बना हुआ है। उनके द्वारा विकसित की गई अवधारणाएं, जैसे कि सहयोगी उपकरण और ज्ञान प्रबंधन, आधुनिक सॉफ्टवेयर और प्लेटफार्मों में एकीकृत की गई हैं, जिनमें एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के उत्पाद शामिल हैं (हालांकि बाद वाला प्रदान की गई सूची में नहीं है, लिंक का उपयोग नहीं किया गया है)।
विरासत और प्रभाव
एंगेलबार्ट के कार्य ने कंप्यूटिंग में कई बाद के विकासों की नींव रखी। इंटरैक्टिव कंप्यूटिंग और उपयोगकर्ता-केंद्रित डिजाइन पर उनका जोर ज़ेरॉक्स पार्क में ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के निर्माण को प्रभावित किया, जिसने बदले में एप्पल मैकिन्टोश और बाद में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़ को प्रेरित किया। हाइपरटेक्स्ट के बारे में उनके विचारों को टेड नेल्सन और टिम बर्नर्स-ली जैसे शोधकर्ताओं द्वारा आगे विकसित किया गया, जिन्होंने वर्ल्ड वाइड वेब बनाया। माउस, जिसका उन्होंने आविष्कार किया, व्यक्तिगत कंप्यूटर के लिए एक सर्वव्यापी इनपुट डिवाइस बन गया।
"बूटस्ट्रैपिंग" की उनकी अवधारणा - उपकरणों को सुधारने के लिए उपकरणों का उपयोग करना - सॉफ्टवेयर विकास और संगठनात्मक प्रबंधन में लागू की गई है। ऑग्मेंटेशन रिसर्च सेंटर की सहयोगी संस्कृति ने आधुनिक चुस्त विकास प्रथाओं और ओपन-सोर्स समुदायों का पूर्वाभास किया। सामूहिक बुद्धि की उनकी दृष्टि, जहां लोगों के समूह जटिल समस्याओं को हल करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करके एक साथ काम करते हैं, अब जनरेटिव एआई और बड़े भाषा मॉडल विकास जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान का एक प्रमुख क्षेत्र है।
एंगेलबार्ट का प्रभाव प्रौद्योगिकी से परे मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन के दर्शन तक फैला हुआ है। उन्होंने तर्क दिया कि कंप्यूटर को केवल कार्यों को स्वचालित नहीं करना चाहिए बल्कि मानव क्षमताओं को बढ़ाना चाहिए, एक अंतर जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन के बारे में बहसों में प्रासंगिक बना हुआ है। SRI और ऑग्मेंटेशन रिसर्च सेंटर में उनका काम दर्शाता है कि इंटरैक्टिव कंप्यूटिंग मानव रचनात्मकता और सहयोग के लिए एक शक्तिशाली उपकरण हो सकती है, एक सिद्धांत जो आधुनिक सॉफ्टवेयर और सिस्टम के डिजाइन का मार्गदर्शन करता है।